स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर माननीय राष्ट्रपति का देश के नाम संबोधन - काशीपुर ब्रेकिंग न्यूज़

Kashipur Breaking News [ www.kashipurcity.com ] Powered By : न्यूज़ वन नेशन

Breaking

Breaking News

Post Top Ad

Friday, August 14, 2015

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर माननीय राष्ट्रपति का देश के नाम संबोधन

  • मैं अपनी सशस्त्र सेनाओं, अर्ध-सैनिक बलों तथा आंतरिक सुरक्षा बलों के सदस्यों का विशेष अभिनंदन करता हूंः राष्ट्रपति
  • नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी को बधाई देता हूं, जिन्होंने देश का नाम रौशन कियाः राष्ट्रपति
  • हमारा सौभाग्य है कि हमें ऐसा संविधान प्राप्त हुआ है जिसने महानता की ओर भारत की यात्रा का आरंभ कियाः राष्ट्रपति
  • अच्छी से अच्छी विरासत के संरक्षण के लिए लगातार देखभाल जरूरी होती हैः राष्ट्रपति 
  •  लोकतंत्र की हमारी संस्थाएं दबाव में हैं, संसद परिचर्चा के बजाय टकराव के अखाड़े में बदल चुकी हैः राष्ट्रपति
  • यदि लोकतंत्र की संस्थाएं दबाव में हैं तो समय आ गया है कि जनता तथा उसके दल गंभीर चिंतन करेः राष्ट्रपति
  • हमारी अर्थव्यवस्था भविष्य के लिए बहुत आशा बंधाती हैः राष्ट्रपति
  • यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि कुछ गिरावट के बाद हमने 2014-15 में 7.3 प्रतिशत की विकास दर वापस प्राप्त कर लीः राष्ट्रपति
  • विकास का लाभ सबसे धनी लोगों के बैंक खातों में पहुंचे, उसे निर्धनतम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिएः राष्ट्रपति  
  • मनुष्य और प्रकृति के बीच पारस्परिक संबंधों को सुरक्षित रखना होगाः राष्ट्रपति
  • जो देश अपने अतीत के आदर्शवाद को भुला देता है वह अपने भविष्य से कुछ महत्त्वपूर्ण खो बैठता हैः राष्ट्रपति  
  • हम गुरु शिष्य परंपरा को तर्कसंगत गर्व के साथ याद करते हैः राष्ट्रपति
  • समाज, शिक्षक के गुणों तथा उसकी विद्वता को सम्मान तथा मान्यता देता हैः राष्ट्रपति
  • क्या आज हमारी शिक्षा प्रणाली में ऐसा हो रहा है, विद्यार्थियों, शिक्षकों और अधिकारियों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिएः राष्ट्रपति
  • हमारी नीति आतंकवाद को बिल्कुल भी सहन न करने की बनी रहेगीः राष्ट्रपति
  • हमारी सीमा में घुसपैठ तथा अशांति फैलाने के प्रयासों से कड़ाई से निबटा जाएगाः राष्ट्रपति
  • भारत, 130 करोड़ नागरिकों, 122 भाषाओं, 1,600 बोलियों तथा 7 धर्मों का देश हैः राष्ट्रपति
  • हमारा लोकतंत्र रचनात्मक है क्योंकि यह बहुलवादी है, परंतु इस विविधता का पोषण सहिष्णुता और धैर्य के साथ किया जाना चाहिए 
  • कानून का शासन परम पावन है परंतु समाज की रक्षा एक कानून से बड़ी शक्ति द्वारा भी होती है : और वह है मानवता
  • हिंसा की भाषा तथा बुराई की राह के अलावा इन आतंकवादियों का न तो कोई धर्म है और न ही वे किसी विचारधारा को मानते हैं
  • हमारे पड़ोसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके भू-भाग का उपयोग भारत के प्रति शत्रुता रखने वाली ताकतें न कर पाएं
  • मैं उन शहीदों को श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने भारत की रक्षा में अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया
     
सौजन्य - डीडी न्यूज़
A Digital Paper - www.adpaper.in & www.kashipurcity.com - न्यूज़, करियर , टेक्नोलोजी

No comments:

Post a Comment

अपनी राय दें। आर्टिकल भेजें। संपर्क करें।

Post Bottom Ad