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Wednesday, August 17, 2016

फलों एवं सब्जियों की उच्च गुणवत्तायुक्त प्रजातियों का विकास किया जाना चाहिए-राज्यपाल

पंतनगर 17 अगस्त- भविष्य में पानी की होने वाली कमी एवं मानसून के अनुकूल न होने कीशा  में वैज्ञानिकों की प्राथमिकता विभिन्न फसलों की उच्च गुणवत्तायुक्त सूखा अवरोधी प्रजातियों के बीजों का विकास करना होना चाहिए। यह बात आज उत्तराखण्ड के राज्यपाल, डा. के.के. पाॅल ने पंतनगर विष्वविद्यालय में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की बीज परियोजना की 11वीं वार्षिक समीक्षा बैठक का मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन करते हुए कही। इस अवसर पर पंतनगर विष्वविद्यालय के कुलपति, डा. मंगला राय; एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सहायक महानिदेषक (बीज), डा. जे.एस. चैहान, भी उपस्थित थे। 

    अपने सम्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की कृषि में औद्यानिक फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए विभिन्न फलों एवं सब्जियों की उच्च गुणवत्तायुक्त प्रजातियों का विकास किया जाना चाहिए। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा सब्जियों की अधिक से अधिक हाईब्रिड प्रजातियों का विकास किया जाना आवष्यक है। खाद्यान फसलों मंे प्रोटीन के अधिक अंष वाली नयी प्रजातियां तथा गन्ने की फसल की गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री की उपलब्धता बनाये जाने पर भी डा. पाॅल ने बल दिया। उन्होंने जैविक खेती की कम उत्पादकता की ओर इंगित करते हुए इसको बढ़ाये जाने की वैज्ञानिकों से अपेक्षा की। राज्यपाल ने भारत को कृषि आधारित व्यवस्था बताते हुए किसानों की ओर अधिक ध्यान देते हुए उसे सभी आवष्यक निवेष एवं तकनीक उपलब्ध कराने की बात कही, ताकि वह देश  को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा देने की अपनी जिम्मेदारी का वहन कर सके। उन्होंने फसलों को रोग-रोधी बनाये जाने, फलों की फसलों की गुणवत्तायुक्त प्रजातियां विकसित करने हेतु बड़े पैमाने पर ‘मदर आॅर्चर्ड’ लगाये जाने, पर्वतीय क्षेत्रों में चारा प्रजातियों की उपलब्धता बढ़ाने, गुणवत्तायुक्त बीजों को किसानों तक पहुंचाने, ट्राउट एवं अन्य मछलियों के बीज उपलब्ध कराने जैसे बिन्दुओं पर ध्यान देने की अत्यंत आवष्यकता बतायी, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों से युवाओं का पलायन रोका जा सके। 

    कुलपति, डा. मंगला राय ने इस अवसर पर बोलते हुए देश  में बीज उत्पादन कार्यक्रम के विकास के बारे में बताया। उन्होंने बीज की परिभाषा के अंतर्गत फसलों के बीजों के साथ-साथ औद्यानिक फसलों व सब्जियों की पौध एवं रोपण सामग्री तथा मछलियों की अंगुलिकाओं को भी सम्मिलित बताया। डा. राय ने भारतीय बीज अधिनियम का पुनर्वालोकन किये जाने की भी सलाह दी, ताकि इसमें दिये गये मानकों में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार बदलाव किया जा सके। कुलपति ने बीज की शुद्धता के साथ-साथ उसके स्वास्थ्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया तथा रोग अवरोधी किस्मों के विकास पर बल दिया। साथ ही विभिन्न प्रकार के बीजों का मूल्य निर्धारण निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही किये जाने के लिए कहा।
    डा. जे.एस. चैहान ने परिषद् द्वारा बीज उत्पादन कार्यक्रम प्रारम्भ किये जाने के बाद से देश  में केन्द्रीय, प्रजनक एवं प्रमाणित बीजों की उपलब्धता में हुई प्रगति की जानकारी दी। साथ ही बीज उत्पादन क्षेत्र में मानव संसाधन विकास तथा विभिन्न राज्यों में बीज निगमों के विकास के बारे में भी बताया। भारतीय कृषि शोध तंत्र (नार्स) में विकसित उच्च गुणवत्तायुक्त प्रजातियों के विकास तथा पुराने बीजों का इनसे पुनस्र्थापन की भी उन्होंने जानकारी दी। उद्घाटन सत्र के अंत में कार्यक्रम के आयोजक सचिव, डा. जे.पी. सिंह ने सभी उपस्थित वैज्ञानिक, जिला प्रषासन के अधिकारियों, विष्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेषक, मीडिया कर्मियों एवं सभी उपस्थितजनों का धन्यवाद किया।
    इस कार्यक्रम से पूर्व राज्यपाल द्वारा विष्वविद्यालय में एक नये अतिथि गृह का षिलान्यास किया गया तथा विष्वविद्यालय की छात्राओं के लिए बने नये छात्रावास ‘सरस्वती महिला छात्रावास’ का उद्घाटन भी किया।

          इस अवसर पर वरिश्ठ पुलिस अधीक्षक अनन्त षंकर ताकवाले,अपर जिलाधिकरी दीप्ति वैष्य व रवनीत चीमा, उप जिलाधिकरी पूरन सिंह राणा,चन्द्र सिंह इमलाल आदि उपस्थित थे।

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